उनकी ज़द से निकलने की, कुछ मोहलत तो दीजिए..
सीने से लगाने को, ग़म·ए·दिल की दौलत तो दीजिए..।
आंसू बहाने को, किसी बहाने की दरकार तो होगी..
मुहब्बत में भीगे से, वो कुछ पुराने खत तो दीजिए..।
कि कुछ कदम भी, सम्भल के चलना मुश्किल हो..
मेरी गुज़ारिश पे, मयखाने में वो बरकत तो दीजिए..।
तेरे दर से देखना, इक दिन चले ही जाएंगे आख़िर..
मेहरबां मेरे इस इंतज़ार की, कुछ कीमत तो दीजिए..।
हमारी ज़फा का कोई गवाह, हमे तो कहीं मिला नहीं..
दिल को बहलाता रहूं, ऐसी कोई तोहमत तो दीजिए..।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







