बस इतनी सी ख़्वाहिश थी उनकी
कि प्यार मिले ऐसा जो हर दर्द में साथ दे,
प्यार मिले इतना कि ग़म, ग़म ना लगे।
हर तकलीफ़ में सीने से लगा के रखे,
गोद में सिर रख बालों को सहलाते रहे।
प्यार मिले ऐसा जो उन्हें दिल में समा ले,
प्यार मिले इतना कि हर मंज़र सुहाना लगे।
जब कोई दर्द रुलाए तो उन्हें गले से लगा ले,
मायूसी हो दिल में कोई
तो कंधे पर सिर रखने की इजाज़त दे।
प्यार मिले ऐसा जो पल - पल साथ निभाए,
प्यार मिले इतना कि कोई भी डर
ना सताए।
ज़िंदगी के किसी भी मोड़ पर हारने ना दे,
हाथों में हाथ ले सब ठीक हो जायेगा
बस यही बात कह दे।
बस इतनी सी ही चाहत थी उनकी,
इससे ज़्यादा कभी कुछ चाहा नहीं उन्होंने।
यही एक छोटी सी आरज़ू थी,
बाकी कोई तमन्ना रखी नहीं उन्होंने।
इससे ज़्यादा कभी कुछ चाहा नहीं उन्होंने ....
इससे ज़्यादा कभी कुछ मांगा नहीं उन्होंने.....
🖊️ रीना कुमारी प्रजापत 🖊️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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