सकून से जीवन जीने की चाहत रखने वाले ये लाज़मी है कि वे झूठ न बोले
झूठ, चुगली किसी का अमानत में ख्यानत करने वाले सदा बेचैन राहत है
बेचैनी मे न अमन न सकून न मस्तिक सही काम करता है एकबार सोचना जरूर
हमने तहकीक किया ख़ुदको मुहासबा किया और आंखों ने महल में सकूं नहीं देखा
वसी अहमद क़ादरी । वसी अहमद अंसारी
मुफक्किर ई कायनात । मुफक्किर ए मखलूकात
दरवेश । लेखक । पोशीदा शायर। 1.3.26


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







