तू नहीं करता तो खुदा करता,
खुदा नहीं करता तो खुद करता,
खुद नहीं करता तब भी हो ही जाएगा,
होना प्रकृति है कैसे टालोगे,
करना जिंदगी है कितना संभालोगे,
तुझे खुद की खबर नहीं फिर भी अपनी कब्र को खबर करता है,
यह जो तू तू आगे निकलते गुजरते यह जो तू खोजने बैठा है,
वो तो यही देखता है कि तू कितना पीस सकता है,
और और मौत तक कितना बारिक कण तू निकल सकता है,
की यही तू ही संभव था और भीड़ में देखा गया कि तू असंभव निकलता है,
क्या जानता है खुद के बारे,
बस इतना कि जैसे गुजर रहा है,
तू भी वैसे ही गुजरने लगता है,
इसलिए आदमी किससे से डरता है,
जिंदगी मौत और बीच में तू,
यह सब जो है यह कुछ भी वश में नहीं है,
बस यह है की बीच में जो तू है,
वही वश में है,
और सारी कहानी सारी जो एक शब्द एक बात है,
वह यही है कि तू ,कि तू यह जिंदगी तेरे हिसाब से चला सकता है,
बस तू अगर वश में ना हो,
किसी भी तरीके से किसी भी वजह से कोई भी प्रभाव नहीं होगा,
अगर तू उसमें शामिल न हो,
तू जहां शामिल होगा,
चाहे जाने अनजाने,
होने करने,
कैसे भी यह अब तुम समझो,
मगर तुम जहां शामिल हो,
वही तुम्हें फिर और शामिल होने के लिए प्रभावित करेगा,
अतः तुम शामिल नहीं,
तुम वश में नहीं,
तुम वश में नहीं,
तुम जिंदगी हो,
तब तुम सजग हो,
तब तुम स्वयं को ही हासिल हो,
तुम तुम्हारी पूजा हो,
तब तुम ही हो सकते हो जो तुम जानना चाहते हो,
तुम ही वही हो,
जो कभी यहाँ कभी वहां,
कभी ऐसे कभी वैसे,
खुद को शामिल करने चला जाता है,
पर जब तुम वास्तव में शामिल होने लगते हो,
तुम वास्तव में उस वश नहीं हो,
बस तुम हो क्योंकि तुम्हें शामिल होना था,
वहां होकर तुम्हें करना था,
तुमने किया,
तुम फिर आनंद हो गए,
तुम वही हो गए जो तुम हो।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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