कविता- स्टेटस
दिल की बात.... जज़्बात.... हालात.....
सब के सब दब गए हैं
आदमी..... आदमी को लायक नहीं समझता के कह सके कुछ
बात - दर्द सब सोशल मीडिया के स्टेटस में सीमित रह गए हैं...
आदमी बातों को मन में कैद किए हुए है....
उलझता है तो झट से स्टेटस लगा देता है
नाराजगी- दर्द - ताना - चाहत सब स्टेटस में कैद है
धारा ऐसी लगी है के आदमी जमानत तक नहीं करा पा रहा
जमानतदार अपने हों तो कुछ बात बने
अपनापन ढूंढना आसान भी नहीं है
अपनेपन का चोला ओढ़े तमाम अपने
वक्त आने पर एक- एक करके बेपर्दा हो रहे हैं..
फिर क्या आदमी मोबाईल का दोस्त बन जा रहा है
और उसकी जुबान उसका स्टेटस
कह सुन सब रहा है...
भाव भी व्यक्त कर रहा है...
पर किससे....?
स्टेटस से और स्टेटस में
-सिद्धार्थ गोरखपुरी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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