एक चांद है और एक तुम हो
वो फलक पर, और यहां तुम हो!
पलकें उठाओ तो, रौशन सारा जहां है
पलकें गिराओ,लगे, खयालों में गुम हो!
बातें तुम्हारी, हवाओं में घुल जातीं हैं
लगता है जैसे, मीठी मीठी तरन्नुम हो!
हमारी आंखों की रंगों की गहराई हो
होंठों पर गहरी नींद में सोई तबस्सुम हो !
हमारी सेहत में, तुम्हारी ही ताजगी है
गगन - मन की,झिलमिलाती अंजुम हो!!
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







