तुम्हारी यादो का घना सन्नाटा,
मौन का मर्म ही बदल रहा।
शब्द थककर सोने लगे जहाँ,
उस जगह अन्वेषण चल रहा।
मन की भीतरी दीवारों पर,
उपस्थिति अंकित कर रहा।
अस्तित्व की धुन्ध में छाया,
अंतर्मन जाने क्यों मचल रहा।
तुम कब मेरे हुए बस लगते रहे,
इस तरह पीड़ा का दखल रहा।
जो धड़कन है मेरे अंतर्मन में,
कचोटता 'उपदेश' का दिल रहा।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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