परमात्मा मतलब स्वयं का वही सत्य जो हमें स्वीकार करना है, स्वयं का स्वीकार ही सत्य हैं और सत्य के भीतर और बाहर के बीच हम जो फंसे हैं उस सत्य के बीच से निकलकर उसमें अपने कारण जो दरार है खाली जगह है उसको भरना, सत्य पर प्रश्न ना होकर सत्य को ही प्रश्न सा ढ़ालना और उसी प्रश्न की कमियों को निकालकर उसे सत्य को उत्तर में ढ़ालना, मतलब उस प्रश्न में कमी हम ही थे और हमें स्वयं को उस प्रश्न से स्वयं निकालकर स्वयं उत्तर बनना होगा मगर सत्य की पूर्णता स्वयं ही जान पाएंगे और कोई से प्रश्न करके उसकी पूर्णता को स्वीकार कर स्वयं पर थोपना ग़लत है, स्वयं ही जब जीवन है तो स्वयं के प्रश्न में स्वयं को ही उत्तर की तरह तलाश और तराशना होगा ❤❤


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







