जब चलना था दो चार क़दम,
क्यूँ पकड़ा मेरा हाँथ सनम
ख़्वाहिशें हो गई रवांँ-रवांँ
तुम्हें पा कर पाया ढेरों गम
क्या ख़बर तुम सितारा हो जाओगे
समझे थे तुम हो मेरे हमदम

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
जब चलना था दो चार क़दम,
क्यूँ पकड़ा मेरा हाँथ सनम
ख़्वाहिशें हो गई रवांँ-रवांँ
तुम्हें पा कर पाया ढेरों गम
क्या ख़बर तुम सितारा हो जाओगे
समझे थे तुम हो मेरे हमदम
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम