"जब चेहरा सामने होता है, तो तुम आईना देखते हो,,
वजहों से घिरे हो, तो औरों की शुरुआत देखते हो,,
खुद से मिली तबाही का कारवां तन्हाई की बारिशें,
साफ़ मौसम में नमी लिए हो, तो क्यूँ इतना चल रहे हो,,
अपनी बातें मिली थी उन कंकर में,
ज़माने से की गई बातें सबके कंकालों में राख होती मिलेगी,
नियत थोड़ी सी बेपरवाही से सबको उसी में कमी मिलेगी,,
महफूज़ नहीं हो बस सलाह मिलेगी,
इसलिए ये सबसे मिलों पूरा जहां देखो,
मगर इतना गौर क्यूँ करते हो,
अपनी बनाई राह ना मिले तो आशिकी का दौर क्यूँ करते हो।"
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







