नाज़ुक उम्र में ही समझदारी ओढ़ ली,
अपनों की खुशी अपनी हँसी से जोड़ ली।
बचपन कहीं पीछे छूटता चला गया,
घर की ज़िम्मेदारियों ने जीवन की राह मोड़ ली।
फिर भी दिल की सादगी कम न हो पाई,
ज़िम्मेदारियों ने भी इंसानियत न चुराई।
हर किसी को बराबर समझने की आदत है,
उनके हर रिश्ते में सच्चाई की इबादत है।
मेरी दीदी के हर सपने को अपना बना लेते हैं,
हर पल बच्चों सा उनका ख़याल रख लेते हैं।
मेरे जीजू भाई जैसे हर क़दम साथ चलते हैं,
आए जो भी मुश्किल, डटकर उसका सामना करते हैं।
— Gitanjali Gavel ✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







