👉 बह्र - बहर-ए-मीर
👉 वज़्न - 22/22/22/22/22/22/2
👉 अरकान - फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
सब के सब बस अपना गम फ़रमाने लगते हैं
समझे ना दूजे को बस समझाने लगते हैं
दौर-ए-मुश्किल में कोई भी साथ नहीं देता
अपने जो लगते थे छोड़ के जाने लगते हैं
मेरे इस दिल की चाहत है ख़ुशियों के दो बोल
आप तो बस मिलते ही रोने गाने लगते हैं
गुल बदले जब ख़ार मिले चाहत के गुलशन में
उम्मीदों के फूल सभी मुरझाने लगते हैं
मतलब के सब रिश्ते हैं सब मतलब की बातें
आज जहाँ में मतलब से याराने लगते हैं
तेरे जाने से घर में सन्नाटा पसरा है
हमको घर इस घर को हम बेगाने लगते हैं
तेरे सारे वादे, वो सब चाहत की कसमें
कल तक सच लगते थे अब अफ़साने लगते हैं
गम पे गम सहकर भी पहले "शाद" ही रहते थे
अब तो खुशियों से भी हम घबराने लगते हैं


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







