सखी री सावन आया,
कब से रास्ता देख रही हूँ,
कोई ना लिबाने आया।
भूल गये मुझे भईया, भौजाई,
मम्मी ने भी ले ली विदाई।
आंसू भरी आँखों से मुझको बचपन अपना याद आया।
याद आये वो तीज के मेले,
कम्पनी बाग़ के नीम के झूले,
सखियो के सँग हँसना, गाना,
बीते पल वो साथ सुहाना।
आज मैं समझी माँ क्यों कहती थी,
बेटी तो है धन ही पराया।
भाई नहीं था मेरा ऐसा,
होगी उसकी कोई मजबूरी,
इसलिए हो गयी इतनी दूरी।
बचपन में होती थी लड़ाई,
क्या इसलिए तुमने बहना भुलाई?
राखी के दिन तो आ जइयो वीरन,
धर ना सकूंगी तब मैं धीरज,
धर ना सकूँगी तब मैं धीरज।
— सरिता पाठक
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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