"ज़िन्दगी की राहें"
कभी धूप है, कभी छाँव है,
कभी हँसी है, कभी ग़म की दास्ताँ है।
चलते रहो बस यूँ ही मुसाफ़िर,
यही तो ज़िन्दगी का इम्तिहान है।
ठोकरें मिलें तो गिरो मत तुम,
हर गिरावट में छिपा उड़ान है।
जो रोशनी ढूँढे दिल के अंदर,
उसी का नाम इंसान है।
कभी खुद से भी बात कर लेना,
कभी ख़ामोशी में झाँक लेना।
सवाल जो जग ने छोड़े अधूरे,
वो जवाब खुद में ढूँढ लेना।
कभी उम्मीद को मरने मत दो,
कभी सपनों को बिखरने मत दो।
ज़िन्दगी है तो जज़्बा रखो,
इस दिल को यूँ ठहरने मत दो।
कदम रुकें तो याद रखना,
हर रात के बाद सवेरा है।
जो हिम्मत रखे आगे बढ़ने की,
उसी का नाम “सफ़र” है।
और जब मंज़िल मिल भी जाए,
तो रुक जाना मत ओ मुसाफ़िर,
क्योंकि असली मज़ा मंज़िल में नहीं —
बल्कि चलते रहने की वजह में है।
~ अभिषेक मिश्रा "बलिया"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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