Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

तेरी आंखों में

तेरी आंखों में बहारों का पूरा मौसम है,
मेरी सांसों में भीगने का पूरा दम-खम है,
कह दो सावन से तेरी मर्जी हो तभी आना,
अभी तो प्रेम -फुहारों का पूरा मौसम है।।

सफर में तुम रहो तो रास्ते सुहाने हैं
बिना तुम्हारे हम तो खुद से ही बेगाने हैं,
तुम्ही से खिलती मेरी जिंदगी के अफसाने,
कदम- कदम पर मेरी राह में तराने हैं।।

बांटने वाले के दिल से मोहब्बत कम नहीं होती,
आंधियों से चराग -ए- चाहत खतम नहीं होती,
कौन कहता है, वो मरकर लाश में दफन हो गया,
खुशबू -ए-गुल-ए - इंसानियत खतम नहीं होती।।


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

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Lekhram Yadav said

समदिल भाई हमारी आंखों में तो बस आपकी रचना के लिए इन्तजार ही रहता है
न जाने क्यूं आपके लिए दिल बेकरार रहता है,
बहुत खूबसूरत रचना आपको सादर नमस्कार

आदर्श भूषण said

वाह! अत्यंत मनोहारी, भावपूर्ण और काव्य-सौंदर्य से परिपूर्ण रचना। आपने प्रेम, समर्पण और इंसानियत जैसे शाश्वत मूल्यों को प्रकृति के सुंदर बिंबों और मधुर उपमाओं के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। श्रृंगार और मानवीय संवेदनाओं का यह सुंदर संगम पाठक के हृदय को स्पर्श करते हुए प्रेम और सद्भाव का प्रेरक संदेश देता है

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

वाह वाह वाह.... रचना इतनी खूबसूरत की तारीफ में लफ़्ज़ ख़त्म हो गए.... बहुत सुंदर सादर प्रणाम आपको 🙏

सुप्रिया साहू said

वाह वाह वाह.....क्या बात है....उनके बहारों के मौसम का इंतजार कर रही सांसे और सावन में भीगने की चाह, उनके आने से कदम कदम पर राह तराने हो जाते हैं, बहुत सही कहा आपने बांटने वाले के दिल से मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती बल्कि उसका दुगुना बढ़ता जाता है, प्रेम और इंसानियत से ओतप्रोत रचना, बहुत खूबसूरत रचना मनोज सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

आप सभी को सादर प्रणाम करता हूं 🙏🙏 ऐसे ही अपनापन बनाए रखिए,प्रीत की महफ़िल सजाए रखिए 🙏🌹

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