कितना भी भूलना चाहो याद आयेगी जरूर।
मोहब्बत वो ताकत है गुल खिलायेगी जरूर।।
मजहब से कोई वास्ता नही नजर के खेल में।
अगर नजर मिल गई फिर रंग लायेगी जरूर।।
प्यार तमाशाई न कर किस्मत से दिल मिलते।
दिल में बस गये 'उपदेश' तडप आयेगी जरूर।।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
कितना भी भूलना चाहो याद आयेगी जरूर।
मोहब्बत वो ताकत है गुल खिलायेगी जरूर।।
मजहब से कोई वास्ता नही नजर के खेल में।
अगर नजर मिल गई फिर रंग लायेगी जरूर।।
प्यार तमाशाई न कर किस्मत से दिल मिलते।
दिल में बस गये 'उपदेश' तडप आयेगी जरूर।।
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