आँसू सिर्फ पानी नहीं है,
ये दिल की सच्ची भाषा है।
जब शब्द नहीं मिलते
दिल की बात कहने को,
तब आँसू बोलते हैं।
कभी चुपके से पलकों पर आकर
ख़ामोशी से बह जाते हैं,
कभी दिल में उमड़े तूफ़ान को
एक पल में उजागर कर जाते हैं ये आँसू।
ये गवाह होते हैं
अनकहे दर्द के,
टूटे सपनों के,
और उस भरोसे के,
जो समय की ठोकरों से बिखर गया।
आँसू कमजोरी नहीं,
बल्कि एक संवेदना का प्रमाण हैं,
जो अब भी ज़िंदा है
पत्थर होते जा रहे
इस निष्ठुर संसार में।
कभी माँ की ममता में ढलते हैं ये आँसू,
कभी प्रेम की पीड़ा बनकर निकलते हैं ये आँसू।
कभी अपनों की बेरुख़ी से जन्म लेते हैं ये आँसू,
तो कभी अपनों की याद में बहते हैं ये आँसू।
आँसू कह जाते हैं
वह सब
जो कभी हम नहीं कह पाते।
इसलिए शायद रो लेने के बाद
मन हल्का हो जाता है,
क्योंकि आँसू सिर्फ बहते नहीं,
बल्कि दर्द को धोकर
आत्मा को संभलने की ताक़त देते हैं।
काश कोई समझ पाता
आँसू की भाषा।
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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