ये सांझ कुछ और ढ़ल जाए, फ़िर दिन का हाल पूछेंगे..
अँधेरों में गुम होने से पहले, उजालों के सवाल पूछेंगे..।
और न जाने कितना सफ़र है बाकी, मौजू-ए-मंज़िल तक..
किसी मौड़ पर रुककर, इस जिस्म-ए-निढ़ाल से पूछेंगे..।
वो साथ भी रहा, और साथ भी न निभाया दिल से..
इन हालातों में कैसे होगा, मिज़ाज़-ए-बहाल पूछेंगे..।
मेरी तबीअ'त कुछ कहती है, दिल-ए-ख़्वाहिश कुछ और..
होश-ओ-हवाश से कुछ न हुआ, तो होकर बे-ख़्याल पूछेंगे..।
ये गफलतों का सिलसिला, रुकता ही नहीं किसी तरहा..
ज़िंदगी जीने का सलीका, अब कोई साहब-ए-कमाल से पूछेंगे..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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