प्रेम हो तो मीरा-सा, जो जग में अमर कर दे,
प्रेम का प्रभाव है, जो पाषाण में प्राण भर दे,
प्रेम की धुन में रम उड़ चला है मन का पंछी,
जग के बंधनों को तोड़ हौसलों को नव पर दे।
प्रेम हो तो मीरा-सा, जो जग में अमर कर दे।
प्रेम में इतनी शक्ति विष को कर दे निष्फल,
प्रेम हो पवित्र तो फिर याद करेगा जग, कल,
काया की परिधि से परे आत्माओं का मिलन,
उसकी साँसें हो कम, मेरी साँसें उसमें भर दे।
प्रेम हो तो मीरा-सा, जो जग में अमर कर दे।
मेरी रग-रग में समाया, हर साँस उसके नाम,
पा कर उसका प्रेम, फिर हो जाऊँ मैं बदनाम,
मेरी पीड़ा के इन गीतों को तू अपना स्वर दे,
या मुझे उससे मिला दे, या उसे मेरा कर दे।
प्रेम हो तो मीरा-सा, जो जग में अमर कर दे।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







