रंगों का खेल होली... खूब खेलो होली,
सबकी अपनी-अपनी टोली, रंगों से भर दो झोली!
ना शरम करो, ना तुम मुखड़ा मोड़ो,
आज जो भी मिले, उसे बाहों में घेरो,
रंगों का खेल होली... खूब खेलो होली!
कोई चचा हो या ताऊ, कोई साला या जीजा,
आज सब पर चढ़ेगा, रंगों का नतीजा!
ये मोहल्ला क्या... अब पूरे शहर को भीगा दो,
DJ की बेस से... धरती हिला दो!
नशे में झूम के बोलो...दिल से खूब डोलो,
उनकी रंगों से भर दो झोली... खूब खेलो होली।
अरे! घर के बड़ों की आज शाम कर दो,
पापा का मूड ज़रा ओन कर दो!
मम्मी को प्यारे-प्यारे रंगों से भर दो,
सारे शरीफों को... आज बिगाड़ो ,
जो बच के निकले, उसकी कमीज़ फाड़ो,
नफरत की तख्ती को... बीच से फाड़ो!
रंगों का खेल होली ..... खूब खेलो होली।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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