बीच जब कायम दिलों के प्यार का पुल है
है कोई उलझन ना बाकी कोई मुश्किल है
दर्द की भवरों में डूबे दिल गर सहसा कोई
हर सांस पर लगता है जैसे आखरी पल है
कैसे बोलूं उसको दुश्मन दोस्तों की भीड़ में
है वही रहता हमारे दुख सुख में शामिल है
गुम हुआ है इस तरहसे इश्क में मेरा वजूद
वो हमारा है मुक़ददर अब वो ही हासिल है
गर्म सांसे आज भी महसूस होती हैं निरंतर
चाह की अब कौन सी ये आखिर मंजिल है
भागता है जिसको पाने आदमी दिन रात ये
दास ख्वाहिश का खज़ाना बेदर्द कातिल है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







