👉 बह्र - बहर-ए-मुसम्मन अश्तर मक़बूज
👉 वज़्न - 212 1212 212 1212
👉 अरकान - फ़ाइलात फ़ाइलुन फ़ाइलात फ़ाइलुन
👉 क़ाफ़िया - आ
👉 रदीफ़ - नहीं
जिंदगी में यूँ भला पास मेरे क्या नहीं
चाहता था मैं जिसे इक वही मिला नहीं
जिंदगी में ख़ुश रहा मैं कमी में भी सदा
है मुझे नसीब से कोई भी गिला नहीं
दूसरों की ख़ामियाँ जानते हैं सब यहाँ
ख़ुद की एक भी कमी का मगर पता नहीं
वक़्त की बिसात है वक़्त की ये बात है
आदमी भला नहीं आदमी बुरा नहीं
माल-ओ-ज़र अगर नहीं पूछता नहीं कोई
आज आप के सिवा कोई आप का नहीं
मार-पीट हर तरफ़ लूट-मार हर तरफ़
आदमी में अब ज़रा आदमी बचा नहीं
हाल देख कर यही लग रहा है आज के
इस जहाँ में 'शाद' अब है कहीं ख़ुदा नहीं
©विवेक'शाद'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







