""पिया थारे बिन मारो हीवडो है घायल,
घायल,
घायल........!
पिया थारे बिन मारो हीवडो है घायल,
पिया थारे बिन मारो मनडो है घायल,
साँची साँची बता तू मने एक बात,
हाँची हाँची बता तू मने एक वात,
साँची साँची बता तू मने एक साथ,
गुजरी है थारी कांईं दर्द सूनी रात,
गुजरी है थारी कांईं दर्द सूनी रात,
रात,
रात..............!
पिया थारे बिन मारो हीवडो है घायल,
पिया थारे बिन मारो मनडो है घायल,
घायल,
घायल.................!
प्यार को घड़ों खाली हैं,
भरयो है कांईं विश्वास,
प्यार है कतरो दोनों ने,
यों तो दूरी ने आभास,
आभास,
आभास............!
पिया थारे बिन मारो हीवडो है घायल,
पिया थारे बिन मारो मनडो है घायल,
घायल............!
आज की प्रेम राह में,
क्यों ढूंढ़ें कल मिलन रो साथ,
जिंदगी को मिलन हो ग्यो मौत रे साथ,
तब तू कांईं कर लो वो याद और वाद,
वाद...........!
पिया थारे बिन मारो हीवडो है घायल,
पिया थारे बिन मारो हीवडो है घायल,
घायल........!
मारा विरह में रह बा वाली सुन ले अंतिम बात,
बात.......!
मैं ही तू हूं,
तू ही मैं हूं,
खत्म है सब कथा को सार,
जिंदगी री माटी में,
तू फूल मैं थारो फल रो स्वाद,
तू है मारी आत्मा,
मैं हूं वां की परिधि,
दोनों ही संग हां,
पलका और पलका थी भीत,
तू ही मारो नयो संग,
मैं ही थारो पुरानो साथ,
जिंदगी के समय में, मैं बाहर तू भीत है,
मृत्यु के अगले पल से तू बाहर मैं भीत हूं।
पिया थारे हीवडा में मैं ही तो हूं घायल,
घायल को दर्द थने है,
दर्द को रूप मैं ही हूं,
पिया थारे बिन मारो हीवडो है घायल,
पिया थारे बिन मारो मनडो है घायल,
घायल........,
घायल..................!!""
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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