जितनी सुविधा,
उतना ही दुःख।
पहले
जब केवल
छत का पंखा चलता था,
तब भी
अच्छा लगता था।
न मच्छरों का डर था,
न गर्मी इतनी अखरती थी।
अब
ठंडी हवा
कूलर देता है,
गर्मी तो
कुछ कम लगती है,
लेकिन
मच्छर
पहले से ज़्यादा आते हैं।
और मन
फिर उसी
खुली हवा के लिए
तरसता है।
न वैसी नींद का बसेरा है,
न वैसा चैन।
यह कैसी सुविधा है,
जिसने
आराम तो दिया,
पर सुकून छीन लिया।
— सुरेन्द्र कल्याण बुटाना


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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