एक से नौ वो A से Z الف سے ی क से ज्ञ वही है नहीं बदला गया आजतक
जो हर्फ को बदल दे वही लोग अपनी ज़िंदगी वो दुनियां बदल सकता है
नया साल न कुछ लेकर आया है कभी न ही कल लेकर आने वाला है
काम न करने पर दुनियां की सरकार न पैसा देगा न कोई मुंह में दाना डालेगा
खाना ख़ुद से खाना होगा ऐसे समझें कि ज़िंदगी ख़ुद से बदलना होगा
जिस तरह हमने जशन या गम मनाने का एक तारीख मुकर्रर किया वह आता है
जेब में पैसा है हराम का या हेरा फेरी का वे होटलों पार्क में जशन मनाता है
शख्त मेहनत हर तरह से जायेज़ धन हासिल होता जिसका जशन नहीं मनाता
जशन दो प्रकार के लोग मनाते हैं लोफर , आवारा वो दौलतमंद लोग
धन जशन मनाने को नहीं कहता अच्छा खाएं दिल खुश रखें मगर ज़ाहिर न कीजिए
अनुभव है मेरा जो खूब खुशियां मनाते यही लोग कोर्ट वो हॉस्पिटल में गम मनाते
आज़ ठान लें दिल में एक जनवरी हाथ में कुछ नहीं देगा हाथ से हासिल होगा
वसी अहमद क़ादरी
वसी अहमद अंसारी
एक जनवरी बीस सौ छब्बीस


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







