Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

नमक जितना इश्क रहे

ना तेरी मोहब्बत का शोर हो
ना मेरी चाहत का हिसाब रहे
बस जब भी जिक्र हो मेरा
तेरे लहजे में थोड़ा लिहाज रहे

बस इतना सा करम रहे
नमक जितना इश्क रहे

ना तू मेरी आदत बने
ना मैं तेरा बोझ बनू
बस जब भी याद आऊं तुझे
चेहरे पे हल्की सी मुस्कान रहे

बस इतना सा करम रहे
नमक जितना इश्क रहे

ना हर रोज मुलाक़ात की जिद्द हो
ना हर पल साथ रहने की प्यास रहे
बस दूर रहकर भी दिल में
एक दूजे की मिठास रहे

बस इतना सा करम रहे
नमक जितना इश्क रहे

तेरी याद का एक सलीका हो
मेरी कमी का भी एहसास रहे
जिंदगी की इस फीकी रोटी में
बस तेरे इश्क़ का स्वाद रहे

बस इतना सा करम रहे
नमक जितना इश्क रहे




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

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सुप्रिया साहू said

वाह वाह वाह....इश्क़ की मिठास तो दूरियों में अच्छी रहती है, न मोहब्बत का शोर, न इश्क़ की आदत, न मिलने की प्यास, बस याद का सलीका और उसमें आपार प्रेम भरा हो और जिंदगी में उसकी एहसास जागी रहे, बस इतना ही तो चाहिए इश्क़ में दूरियां जितनी भी हो लेकिन कड़वाहट कभी न आए, बहुत खूबसूरत रचना सौरव सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

चुटकी भर नमक पर स्वाद इतना कि मन को पूरी तसल्ली।बस यही चाहत लिए प्रेम की ऐसी पंक्तियां लिख दी आपने कि मन में हर बंध स्वादिष्ट मनभावन व्यंजन की तरह उतर गई। वाह क्या बात है। खूबसूरत रचना 👌👌🙏🙏🙏

Lekhram Yadav said

बहुत खूबसूरत और लाजवाब रचना आपको सादर नमस्कार

आदित्य शेखर 'अनुगूँज' said

आपने प्रेम की मर्यादा, संतुलन और आत्मीयता को 'नमक जितना इश्क' जैसे अत्यंत सुंदर प्रतीक के माध्यम से हृदयस्पर्शी ढंग से अभिव्यक्त किया है। सादगी में गहराई समेटे यह रचना पाठक को रिश्तों की मिठास और परिपक्व प्रेम का सहज अहसास कराती है। ❤️🌿👏

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

बस इतना सा करम रहे नमक जितना इश्क रहे.. वाह बहुत खूबसूरत रचना सर जी... बस इतना सा करम रहे कि आप यूं ही लिखते रहे... सादर प्रणाम आपको 🙏

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