लगता है किसी ने, दिल से दुआ दी मुझको..
सुबह के बाद फिर से, इक सुबहा दी मुझको..।
उनसे मुहब्बत का, खुलासा ता–उम्र न हुआ..
दर्दे -दिल छुपाने की, किसने अदा दी मुझको..।
कि अंधेरे में था शहर तेरा, तो सब महफूज़ ही था..
रोशनियों ने आके सब, हकीकत दिखा दी मुझको..।
है ये मेरा भी नाम-ओ-शोहरत कोई वक्त के लिए..
वो यूं ही कहता है, नामे-ज़िंदगी लिखा दी मुझको..।
मैं ज़िंदगी के कटघरे में, बे-खता होकर खड़ा रहा..
ना–मालूम उसने, किस बात की सज़ा दी मुझको..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







