(बाल कविता )
चप्पल
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काम सभी के आती चप्पल।
घर - घर पाई जाती चप्पल ।।
काँटों को चुभने न देती ,
कील हमें लगने न देती ,
खुद घायल हो जाती है जब ,
मोची से सिल जाती है तब ,
कंकड़-पत्थर, लोहा-लंगड़
सबसे सदा बचाती चप्पल।
घर - घर पाई जाती चप्पल ।।
पाँवों की शोभा बन जाती ,
सफर सरल सबका करवाती ,
मिट्टी धूल नहीं लग पाती ,
कीचड़ से भी हमें बचाती ,
पैरों को कर सदा सुरक्षित
मंजिल तक पहुँचाती चप्पल।
घर - घर पाई जाती चप्पल ।।
रबर, प्लास्टिक, चमड़े वाले,
बहुत लचीले कपड़े वाले ,
ऊँची-नीची एड़ी रखते ,
नई डिजाइन के भी बनते ,
हरी-गुलाबी-नीली-पीली
रंग -बिरंगी भाती चप्पल।
घर - घर पाई जाती चप्पल ।।
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~ राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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