घर की देहरी पर ठहरा हुआ
वह आदमी
हर सुबह खुद से एक छोटा-सा वादा करता है—
“आज थोड़ा कम थकूँगा…”
और हर शाम
वह वादा उसके जूतों की धूल में
कहीं खो जाता है।
रसोई से आती चाय की भाप में
पत्नी की चुप चिंता घुली होती है,
बच्चों की हँसी में
अधूरी फीस की खनक छिपी होती है,
और उसकी आँखों में—
नींद नहीं,
बस हिसाब-किताब के अधूरे पन्ने होते हैं।
वह निकलता है
सपनों की गठरी कंधे पर रखकर,
जैसे कोई मजदूर
ईंटों से नहीं,
उम्मीदों से घर बनाता हो।
सड़कें उसे पहचानती हैं,
बसें उसका इंतज़ार नहीं करतीं,
और भीड़—
वह भीड़ तो हर रोज़
उसके अस्तित्व को थोड़ा और धक्का देती है,
फिर भी
वह गिरता नहीं,
क्योंकि घर की नींव
उसके कदमों से जुड़ी होती है।
ऑफिस की कुर्सी पर बैठा
वह सिर्फ काम नहीं करता,
वह जोड़ता है—
हर मिनट में कुछ रुपये,
हर रुपये में एक मुस्कान,
हर मुस्कान में
अपने परिवार की साँसें।
कभी बॉस की डाँट,
कभी किस्मत की चोट,
कभी अपने ही सपनों का बोझ—
सब कुछ चुपचाप सहता है वह,
क्योंकि उसे रोने की फुर्सत नहीं,
और न ही
उसके आँसुओं की कोई तनख्वाह मिलती है।
दोपहर का खाना
अक्सर ठंडा ही रह जाता है,
जैसे उसके भीतर की इच्छाएँ—
जिन्हें वह हर दिन
थोड़ा-थोड़ा मारता है,
ताकि घर में
किसी की इच्छा अधूरी न रह जाए।
शाम को जब लौटता है
तो दरवाज़ा नहीं खुलता,
एक दुनिया खुलती है—
बच्चों की दौड़ती हुई बाहें,
पत्नी की आँखों में
अनकहा गर्व,
और उस थकान में
एक अजीब-सी शांति।
वह मुस्कुराता है,
जैसे दिन भर की लड़ाई
बस इसी पल के लिए लड़ी हो।
रात को
जब सब सो जाते हैं,
वह छत को देखता है
और सोचता है—
“क्या यही जीवन है?”
फिर खुद ही जवाब देता है—
“नहीं,
यह तो जिम्मेदारियों की यात्रा है,
जिसमें मैं ही रास्ता हूँ,
और मैं ही मुसाफ़िर।”
वह आदमी
कभी हारता नहीं,
बस थोड़ा-थोड़ा टूटता है,
और फिर हर सुबह
खुद को जोड़कर
फिर से निकल पड़ता है।
क्योंकि उसके लिए
पैसा सिर्फ कागज़ नहीं,
वह घर की रोटी है,
बच्चों का भविष्य है,
पत्नी की साड़ी का रंग है,
और माँ की दवा की आखिरी उम्मीद है।
उसका संघर्ष
किसी किताब में नहीं लिखा जाता,
पर हर घर की दीवारों पर
उसकी मेहनत की परछाई होती है।
वह आदमी
जो घर से निकलता है हर रोज़—
असल में
वह सिर्फ कमाने नहीं जाता,
वह अपने परिवार को
हर दिन थोड़ा-थोड़ा
जीता है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







