हम मुस्काना भूल गए
जब से शादी हुई हमारी हम मुस्काना भूल गए
बाबुल की गलियों में हम आना जाना भूल गए
रीत न जाने कैसी है, हम घर अपना छोड़ आए
खुशियों, के मेलों में हम, खाना पीना भूल गए
सुख और दुख से भरी हुई हैं खुशियां मेरी सारी
अन्जाने लोगों में, सखियों संग रहना भूल गए
जिम्मेदारी, नई-नई आ गई, कितनी सिर पर
इनके बोझ तले दब कर आना-जाना भूल गए
घर में जब लक्ष्मी आई, सपने चकनाचूर हुए
ससुराल में मेरे अपने, साथ निभाना भूल गए
जब उनके सिर पर दानव दहेज का सवार हुआ
हम अपनी खुशियों से आंख मिलाना भूल गए
रहने लगे हम डरे-डरे, जब डाला हिंसा ने डेरा
तानों और उपेक्षा में सब कुछ अपना भूल गए
किसी और की खातिर क्यूं घर से निकाल दिया
टूटा कहर जब मुझ पे कफन लाश पे डाल गए
कैसी ये दुनियां है जहां औरत का सम्मान नहीं
हक बराबर का देकर वो साथ बिठाना भूल गए
बहू चाहिए सास ससुर को लड़के को कोई और
ये कैसी शादी है जिसमें मरना जीना भूल गए
कह दो आज जमाने से अपनी सोच बदल डाले
सबको खुशी से जीने दो यादव कहना भूल गए
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







