कविता - शीर्षक।
कल का क्या? भरोसा हैं।
किसी की ज़िदगी बड़ी,
तो फिर किसी कि जिन्दगी,
छोटी होतीं हैं।
मौत किसी के दरवाजे पर तो,
किसी के सिर पर खड़ी होतीं हैं।
कौन जाने किसी के हिस्से कल ,
का सूरज आएगा कि नहीं?
जिससे मुँह फुला कर बैठें हो,
आज तुम, वो क्या? पता कल,
मिल पाएगा कि नहीं।
दिल से जुड़े रिश्तों को,
यूँ ना गलतफहमियों का शिकार बनाइये।
मन - मुटाव की इस गांठ को इतना कस,
कर ना लगाइए।
ये वक़्त की रेत हाथों से,
फिसल ना जाये , उससे पहले
अपनो को गले लगा , लेना चाहिए।
_ रत्नप्रिया - त्रिपाठी
सूचना: Likhantu.com पर वार्षिक मेंटेनेंस कार्य के कारण वेबसाइट
24 से 48 घंटों तक रखरखाव की प्रक्रिया में रहेगी।
इस दौरान आपका समस्त डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और सेवाएँ
निरंतर चालू रहेंगी। हालांकि, मेंटेनेंस के समय कुछ अस्थायी
तकनीकी समस्याएँ आ सकती हैं।
ऐसी किसी भी असुविधा के लिए हम पहले से क्षमाप्रार्थी हैं।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







