मेरा कवि सड़क पार करते हुए डरता था
वह यातायात नियमों में सामान्य था
स्नान से पहले एक कविता लिखता था
अपनी कविता कौवों को सुनाता था
कवि दर्शन की बातें करता था
कवि देश की बातें करता था
अगर कभी मिज़ाज बने,
शायरियां फ़रमाता था
एक बार उसने एक कविता लिखी
'नहानघर में उस रोज़ साबुन नहीं थी'
कवि की मौत तमाम कविताओं पर अल्पविराम थी
ट्रक वाला हांफता भाग रहा था,
चबूतरों के लोग दौड़ रहे थे,
कौवा मांस का टुकड़ा खोज रहा था,
कविता नहीं उस रोज़, साबुन कवि की जेब में था....
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विक्रमजीत
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







