नफ़स (नज़्म)
हर एक नफ़स मेरी
किसी ज़हर से कम नहीं
ये हर पल, हर घड़ी
सताती है, जलाती है, रुलाती है मुझे
एक मैं हूँ कि क़ज़ा का मुंतज़िर ठहरा
और हर एक नफ़स ज़िन्दा कराती है मुझे
एक आती है, एक जाती है
नए उम्मीदों को ये जगाती है
मेरे सीने रह रहकर ज़हर घोलती है
मैं हूं अभी बाकी अक्सर बोलती है
नए सपने ज़िंदगी के दिखाती है मुझे
सताती है, जलाती है, रुलाती है मुझे
एक-एक करके साथ सब छूटे
जितने अपने थे हाथ, सब छूटे
साथ ये छोड़ती नहीं मेरा
भरम ये तोड़ती नहीं मेरा
रोज़ नये ख़्वाब दिखाती है मुझे
सताती है, जलाती है, रुलाती है मुझे
मेरी धड़कन जो मातम का काम करती है
ये उसके वास्ते मरहम का काम करती है
उसकी लय पाकर ये उठती-गिरती
ये मेरे जिस्म में चलती-फिरती
रोज़ क़ज़ा से बचाती है मुझे
सताती है, जलाती है, रुलाती है मुझे
शायद रुक जाए पल भर को ये
फिर न लौटे उम्र भर को ये
जाने कैसे ये सिलसिला टूटे
मेरे जीने का हौसला टूटे
अब निकल जाऊं इस क़फ़स से मैं
तंग आ गया हर नफ़स से मैं।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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