मिले जब वो पहली बार
मानो खुदा भी मुस्कुरा रहे थे,
खुदा की रज़ा मंदी से ही
दो दिल आज करीब से मिल रहे थे।
खुदा का ही करिश्मा है
जो भी हुआ ज़िंदगी में,
बहुत दर्दनाक था समय वो
पर आज खुश हैं एक ही आशियाने में।
वो दर्द ना मिला होता गर
तो आज हम ना मिले होते,
अस्तित्व लौट कर ना आता हमारा
अगर वो फिर से लौट के ना आए होते।
कुछ इस तरह बसा लिया हमने
एक दूजे को दिल में,
कि अब एक पल दोनों को एक दुसरे
के बिना चैन नहीं मिलता।
आंखो से थोड़ा भी ओझल हो जाना
मंज़ूर नहीं दोनों को,
थोड़ा सा हटे क्या निग़ाहों से
सुकून दिलों का छिन जाता।
✍️ रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी'✍️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







