मैं सितारा नहीं हूँ,
मैं दुबारा नहीं हूँ,
मैं तुम्हारा नहीं हूँ,
मैं मिलने के लिए पुकारा नहीं हूँ,
मैं कोई सहारा नहीं हूँ,
मैं खुद का भी प्यारा नहीं हूँ,
मैं ज़ंग से उलझा हूँ,
हार के कभी हारा नहीं हूँ,
इतनी जिन्दगियों ने शादी की है,
उनके तार बेतार तरीकों से मैं अब कुंवारा नहीं हूँ,
जग इतनी चिल्लाहट कर दिया,
मैं बार बार कोई नारा नहीं हूँ,
हवस होती है क्या जिंदा लाशों में,
वो किस चासनी में डूबे हैं,
मैं भी इतना खारा नहीं हूँ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







