आज फिर मन कच्चा होकर अटक गया।
कृपा प्राप्त हुई नही दिन फिर सरक गया।।
दबे पाँव अँधेरा भी घिरता गया चारो ओर।
मतलबी सूर्य निकला धीरे से खिसक गया।।
बुरा लगना स्वाभाविक आकाश हुआ नीला।
दहलीज से ठोकर खाया अँगूठा चटक गया।।
मोहब्बत में यादो की कारीगरी जाती नही।
गलती कहाँ हुई महबूब रास्ता भटक गया।।
झील सी आँखें दुख का बोझ सह न सकीं।
एक एक कर आँखों से आँसू भी टपक गया।।
आये नही है लौट कर प्रियवर गए 'उपदेश'।
हाथ काबू से बाहर हुआ गिलास सटक गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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