कहीं किसी गली में
कभी कोई मिला था
उसे अपना मैं लगा हूँ
उसने मुझे कहा था
वो अकेला मैं अकेला
सोचा साथ देते हैं
एकदूसरे का
सब कुछ ठीक था
फिर जैसे कोई तूफान आया
वो अकेला न रहा
उसका पूरा खानदान
जमीं से निकल आया
वो अकेला था पर अब नहीं
मैं अकेला था और अब भी हूँ
गलत है "प्यार" को महत्व देना।
Originally posted at : https://www.amarujala.com/kavya/mere-alfaz/ashok-pachaury-it-is-enough-to-waste-for-love
ASHOK__KUMAR__PACHAURI
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







