Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

मैं बस तुम्हारी बनना चाहती हूँ - सुप्रिया साहू

मैं वही बन जाना चाहती हूँ,
बच्चों जैसी दिखने और बातें करने वाली,
मैं तुम्हें वही बनाना चाहती हूँ,
जैसे तुम पहले आए थे बच्चों के जैसे,
मैं फिर से रूठना चाहती हूँ,
बिल्कुल उसी तरह जिस तरह तुम मुझे मनाते थे,
मैं वही खुशियां पाना चाहती हूँ,
जिस तरह तुम याद करते और
मैं पैर खुजलाती थी,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जिस तरह तुम मेरी बात माना करते थे,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जैसे तुम गुस्सा दिलाके मनाते थे,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जैसे तुम मुझे अपनाए थे,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जिस तरह तुमने मुझे पहली बार देखा था,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जिस तरह तुमने मुझे पहली बार सीने से लगाया था,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जिस तरह बिन कुछ कहे समझ जाया करते थे,
मैं बस तुम्हारी बनना चाहती हूँ,
जब तुमने मुझसे पहली बार बात किया था...।।

- सुप्रिया साहू




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (6)

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Lekhram Yadav said

तुम जो चाहे बनो हमें कोई ऐतराज नहीं, मगर तुम्हारी इस मासूम और सादगी से हम बहुत प्रभावित हैं कितने प्यार से और कितनी सहजता से तुम ने अपने बचपन की नटखट अदाओं को रचना के माध्यम से पेश कर दिया, बहुत खूब और बहुत खूबसूरत रचना, सुप्रभात सहित सादर नमस्कार

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

आदित्य शेखर 'अनुगूँज' said

आपने स्मृतियों, अपनत्व और प्रथम प्रेम की मासूमियत को अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में पिरोया है। यह रचना बीते हुए सुनहरे पलों को फिर से जी लेने की सच्ची चाह को हृदयस्पर्शी ढंग से व्यक्त करती है। 🌸❤️

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

वन्दना सूद said

wah wah बहुत सुंदर रचना 👌👌

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद मैम 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

प्रेम में मासूमियत, नजाकत,संजोयी यादें, और मीठी यादों के पुनरागमन की तड़पती अभिलाषा, सुप्रिया जी हम तो आपकी रचना पढ़कर 20 की उम्र में चले गए। अतिसुंदर मनोभावों का कोमलतम चित्रण 👌👌🙏🙏🙏

सुप्रिया साहू replied

ठीक है फिर 20 की उम्र का मज़ा लीजिए😁, बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

ममता तिवारी said

बहुत सुंदर रचना मैं तुम्हारी बनना चाहती हूं बहुत सुंदर बहुत खूब

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद मैम 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

क्या बात है 👍 बहुत बढ़िया

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद मैम 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

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