मैं वही बन जाना चाहती हूँ,
बच्चों जैसी दिखने और बातें करने वाली,
मैं तुम्हें वही बनाना चाहती हूँ,
जैसे तुम पहले आए थे बच्चों के जैसे,
मैं फिर से रूठना चाहती हूँ,
बिल्कुल उसी तरह जिस तरह तुम मुझे मनाते थे,
मैं वही खुशियां पाना चाहती हूँ,
जिस तरह तुम याद करते और
मैं पैर खुजलाती थी,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जिस तरह तुम मेरी बात माना करते थे,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जैसे तुम गुस्सा दिलाके मनाते थे,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जैसे तुम मुझे अपनाए थे,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जिस तरह तुमने मुझे पहली बार देखा था,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जिस तरह तुमने मुझे पहली बार सीने से लगाया था,
मैं वही बनना चाहती हूँ,
जिस तरह बिन कुछ कहे समझ जाया करते थे,
मैं बस तुम्हारी बनना चाहती हूँ,
जब तुमने मुझसे पहली बार बात किया था...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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