जिन्दगी तुम्हारे अनुसार नहीं चल रही,
तो क्या हुआ?
परिस्थितियाँ तुम्हारे अनुसार नहीं ढल रही,
तो क्या हुआ?
तुम रुकना और सोचना, फिर चलना
गिरने की जरूरत नही, सँभलना जरूरी
वक्त गतिशील है बदलेगा जरूर 'उपदेश'
तकलीफें आएगी..तो क्या हुआ?
रास्ता ऐसा चुनो मिलकर हमदर्द से
आगे निकलना होगा सरल भाव से
फिर एक दिन वो मुकाम आएगा जहाँ तुम्हें पहुँचना
घमण्ड आने लगे .. तो क्या हुआ?
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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