जीवन-पथ पर चलता मानव, संघर्षों से हार न माने,
सुख-दुःख की इस सरिता में वह, साहस का दीपक ही जाने।
प्रतिस्पर्धा के इस युग में, हर मन आकांक्षाओं का दास,
अभाव, अशांति, चिंता, पीड़ा—करते रहते जीवन उदास।
स्वार्थ, लोभ और ईर्ष्या ने, मन की कोमलता हर ली है,
समयाभाव की तीखी धारा, अपनों से भी दूरी कर दी है।
कदम-कदम पर कठिन परीक्षा, धैर्य सदा परखा जाता है,
विपदा की प्रचंड आँधी में, आशा-दीप डगमगाता है।
फिर भी साहस, संयम, श्रम से, जीवन अपना खिल जाता है,
संघर्षों की तपती भट्ठी में, व्यक्तित्व स्वर्ण-सा बन जाता है।
विपदा देती ज्ञान अनोखा, अनुभव का उपहार महान,
जो न झुके प्रतिकूल समय में, पाता है सच्चा सम्मान।
कठिनाई चाहे कितनी हो, उससे क्यों घबराना है?
हर बाधा को धैर्य सहित, हँसकर आगे बढ़ जाना है।
अथक प्रयासों की शक्ति से, हर अँधियारा ढल जाता है,
दृढ़ संकल्प और विश्वास से, हर पथ सरल निकल जाता है।
जो निरंतर कर्मरत रहता, वह मंज़िल पा ही जाता है,
कठिनाई कितनी भी गहरी हो, मानव उससे निकल ही जाता है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







