मैं, उस ओर तुम,जीवन
मैं तो भूल गई थी रस्ता, क्यूँ आई जीने पहली बार,
मैं तो ढूंढ रही थी अंगना, जहाँ खोई थी पहली बार,
हो हो ओ ओ ओ ओ..........
दिल में बैठ तेरी यादें जो देने लगी मीठा प्यार,
अब तो खोने ना दूंगा तुझको इस अंगना के उस पार,
मैं तो भूल गई थी रस्ता, क्यूँ करता है मुझसे इकरार,
हो हो ओ ओ ओ ओ..........
तुझे, मैंने जो देखा यहाँ वो दिखाऊंगा ना कभी,
तेरे लिए, बंद राहों में घर ना बनाऊँगा कभी,
जो भी रिश्ता होगा तेरे मेरे बीच वादा कोई निभाने को ना लाऊँगा कभी,
थोड़ा दिल की सूरत पर अपनी नजर रख जा,
मैं खुद तुझको प्यार भी मामूली करूँगा,
पर मेरे अंगना में थोड़ी साँस ले ले,
आराम फरमा रहा हूँ वो भी कर ले,
क्यूँ जाना है तुझे, इस पल भर के राही को यूँ छोड़ कर,
बस तू तो है जिसे जान पाया हूँ,
अब तो मेरी जान को थोड़ा जी मिला है,
यहाँ के बाद भी,
अब क्यूँ तुम भी ये मृगतृष्णा बन रही हो,
अब क्यूँ तुम भी निकलते हुए एक पल में जीवन बन रही हो,
अब तुम कहो,
अब मैं क्या कहूँ,
मुझे तो यहाँ के जीवन में अपना हलचल खोना नहीं है,
तुम प्यास में इसलिए तड़प रखते हो,
क्यूँ जीवन को दूरियों में खुला रखते हो,
बस बेचैनी से प्यार नहीं होता है,
जीवन पूरा ही बच गया क्यूँ इसे खोता है,
यहाँ जो माँगा वो ना मिला,
यहाँ जो देखा वो ना दिखा,
यहाँ जो चाहा वो और को गया,
यहाँ क्यूँ तुम्हारे बिन तुम चलते हो,
कह दिया जो कहती तुम्हें,
रस्ता खुद अपने बने मोड़ यादों में भूला देगा,
भूलते उसे मेरा पहला रस्ता याद आ जाएगा,
मैं खुद को लिये अपने जीवन को खुद में ढ़ाल ली हूँ,
मेरा मेरे जीवन से विलय है,
कोई भी नाटक अब ना होगा,
कोई भी भूमिका ना कर पाऊँगी,
जा रहीं हूँ जीवन संग चली जाऊँगी,
नहीं तुम्हें कोई छवि दे पाऊँगी।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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