माँ: पहली भगवान
बरगी बाँध हादसे में माँ की ममता को नमन
शिवानी जैन एडवोकेट Byss
बरगी की लहरों ने जब काल बनकर घेरा,
एक माँ ने सीने से लगा लिया अपना सवेरा।
तन पर थी लाइफ जैकेट, पर बेटे को बाँधा,
खुद डूबी अँधेरे में, बेटे को उजाला सौंपा।
पानी सबको तैरा देता है जैकेट पहनाकर,
पर ममता ने तैरना नहीं, डूबना चुना हँसकर।
बोली होगी लहरों से “मेरा बेटा ले लो पार,
मुझको डुबो दो, पर इसे दे दो नई बहार।”
शायद इसीलिए जग कहता—माँ पहली भगवान,
जो खुद मिटकर भी रच देती है संतान का जहान।
नौ महीने कोख में, उम्रभर आँचल की छाँव,
और अंत समय में भी दे गई जीवन की नाँव।
जबलपुर की बरगी सुनो, तुम गवाह हो उस पल की,
जहाँ हार गई मौत भी एक माँ के संकल्प से।
जैकेट ने न बचाया जिसको, माँ की बाँहों ने तारा,
ऐसी ममता के आगे नतमस्तक है ये जग सारा।
जो चले गए उन सबको अश्रुपूरित नमन हमारा,
ईश्वर उन परिवारों को दे दुःख सहने का सहारा।
बच्चे की साँसों में अब धड़केगी माँ की कहानी,
कि मर कर भी अमर हो जाती है माँ की ज़िंदगानी।
हे प्रभु, अब ऐसी परीक्षा किसी माँ से न लेना,
हर लहर को ममता का मान सिखा देना।
बरगी के पानी में आज भी गूँजता है वो रिश्ता,
जहाँ माँ ने लिख दिया—“प्रेम की परिभाषा मैं ही हूँ, किस्ता-किस्ता”।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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