हर शहर में देखता हूँ,
कर्मशील जगहों में एक
बेहद छोटे कद का आदमी..
वो बस क्रियाशील और
अपने में निमग्न दिखता है..
पहली बार देखकर हर कोई
चौंकता है, और विचित्र
मुद्राओं से देखता है, किंतु
वो कभी ऊपर नहीं देखता
बस जमीन की ओर ताकता
अपने काम में अविचलित
लगा रहता है..।
मैने उसे कभी थकते और
विश्राम करते नहीं पाया।
लोग उसे लगभग हर बार
कुछ नए और अनोखे नाम से ही
पुकारते हैं, और वो बिना कोई
प्रतिक्रिया दिये,
वो करता जाता है,
जो उसे करना होता है।
अब मैं उसको कुछ और स्पष्ट
देख पा रहा हूँ,और देखता हूँ,
कि उसका कद बाकी
सब से बड़ा होता जा रहा है..
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







