"मैं खुद नहीं मेरी माँ का हिस्सा हूं "
"माँ तुममें मैं था,
तुम्हारी ममता से,
उस कोमल प्रेम से,
मैं जहाँ को देख पाया,
तुम हो ऐसी,
कि मेरे निकट आयी,
पीड़ा को हर लेती हो,
और सारे दुखों को,
चूर कर देती हो,
समय का पहिया तो माँ तुम्हारी,
पायल की छन छन में था,
तुमसे पूछे बगैर वो दिन भी नहीं
चलने देता,
मेरी पहली मोहब्बत तुम से ही,
शुरू हुई,
सच्चे प्रेम की जीवन लीला,
तुमसे ही मिली,
तुमने जीवन दिया,
तुमने मुझे मेरा एहसास दिया है,
मैं हूँ,
ये खोज तुमसे ही है माँ,
ईश्वर की पहली सुबह ही,
तब जब कोई माँ बनती हैं,
उसकी पहली साँसे,
तुम्हारे आँचल में बंद हैं,
संसार का सारा सुख,
माँ को खुश रखने में है,
बाकी अपना कौन होगा माँ,
तुम ही हो माँ,
तुम ही,
और जिन्दगी की,
मेरी बदलती कहानियों में,
तुम्हें अपनी उस पहली साँस की तरह,
याद रखूँगा माँ,
याद रखूँगा।।"
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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