रिश्तों की कायी में फ़िसल गई थी तुम।
सम्हलने की कोशिश में इंसान हुई तुम।।
तुमसे दूर रहकर भी ख्याल आता रहा।
यकीं झूठा नही दिल में मेहमान हुई तुम।।
ख्वाबों के शहर में ही मकान बना लिया।
अस्मत की वज़ह से अनजान हुई तुम।।
दिल के वीराने में आज भी हलचल है।
दिमाग मानता नही कि बेईमान हुई तुम।।
तुम्हारे बारे में चर्चा हर तरफ 'उपदेश'।
कई लोगों की निगाह में शैतान हुई तुम।।
खुदा की रहमत से तुम आओगी जरूर।
मेरी निगाह से देखो कैसे महान हुई तुम।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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