~गजल~
लत बुरी थी हटा नही पाये,
सच किसी से जता नही पाये।
कम नही था बुरा जहां भर से ,
लानतों से बचा नही पाये।
आदमी की खता कभी खुद से,
हम जुबानी बता नही पाये।
क्या किया जो कभी न था करना ,
लाभ हानी रटा नही पाये।
दोष इतना भरा पड़ा 'प्यासा'
बोझ अपनी उठा नही पाये।
© विजय कुमार पाण्डेय ' प्यासा '
सिवान, बिहार


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







