ख़्वाब सजाना हमने भी सोचा था,
अपना बनाना हमने भी सोचा था।
उड़ते परिंदे को थामने की ख़ातिर,
हाथ बढ़ाना हमने भी सोचा था।
लगे नहीं अब यहाँ कोई अपना सा,
दिल में बसाना हमने भी सोचा था।
दिल की गहराई से तुम्हें चाहकर,
तुमको ही पाना हमने भी सोचा था।
दर्द बताया जाता नहीं हर किसी को,
चुपचाप छुपाना हमने भी सोचा था।
टूटे हुए ख़्वाबों की इस दुनिया में,
फिर से मुस्कुराना हमने भी सोचा था।
मगर वक़्त ने कुछ ऐसा सितम ढाया,
हर ज़ख़्म छुपाना हमने भी सोचा था।
अब दर्द भी दिल का बोझ बना बैठा,
फिर भी निभाना हमने भी सोचा था।
लेखक_ चौधरी बिलाल
गाँव टिडौली_ अम्बैहटा पीर
जिला_सहारनपुर उ०प्र


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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