कविता : समझने की उमर....
जब छोटा था मां कहती
तू कहां सही है ?
बिल्कुल बुद्धू
समझता नहीं है
जब बड़ा हुआ बैंड बाजे
बजे शहनाई
अपने घर पर मेरी
एक बीबी आई
फिर बीबी बोली,
तुम कहां सही हो ?
बिल्कुल बुद्धू
समझते नहीं हो
जब बूढ़ा हुआ बच्चे बोलते
पापा आप कहां सही हो ?
आप बिल्कुल बुद्धू
कुछ भी समझते नहीं हो
फिर मुझे खयाल आया मेरी
समझने की उमर कब आएगी ?
या मेरी सारी की
सारी जिंदगी यूंही चली जाएगी ?
या मेरी सारी की
सारी जिंदगी यूंही चली जाएगी.......?
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







