कविता : रात का निमंत्रण....
प्रिय तुम्हारे लिए सारी
रात दरवाजा खोला था
कैसे भी करके तुम को मैंने
रात में आने को बोला था
तुम हो कि अभी
सुबह को आ रही हो
अपनी वो शक्ल
क्यों मुझे दिखा रही हो ?
न इस बख्त तुम्हारे
गालों को चूम सकता
न तो फिर तुम्हारे
बाहों में झूम सकता
अगर मैं तुम्हारे
गालों को चूमु तो
अगर मैं तुम्हारे
बाहों में झुमु तो
आस पास के लोग
क्या कहेंगे ?
अरे पगली वे थोड़ी
चुप रहेंगे ?
तुम जहां से आई हो
वहीं चली जाओ
अब तुम कभी भी मेरे
पास में न आओ
अब तुम कभी भी मेरे
पास में न आओ.......
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







