हे रोम रोम तेरे नाम शिव,
कृपा करो शिव कृपा करो शिव,
हे जो भी गलती मुझसे हुई,
क्षमा करो शिव क्षमा करो शिव,
तेरी तपस्या की निरंतरता,
तेरे ध्यान की निरंतरता,
तेरे ज्ञान की निरंतरता,
तेरे सत्य की निरंतरता,
इतना होने पर भी गरल से कंठ को करना सुशोभित,
कृपा करो शिव कृपा करो शिव,
इतना शांत होना कि,
सदियां बीत जाएं,
ध्यान में इतना मग्न हो जाना,
कि तीनों लोक जगाने आए,
फिर भी अपने त्रिनेत्र से,
सब पर दृष्टि बनाए,
इतना अलौकिक अज्ञेय रहकर,
लौकिक ज्ञान देता,
सारा जग तेरी भक्ति करता,
भूत प्रेत सब तेरे ही चेले,
सबका तू प्रीत रिश्ता है,
सबका तू सबसे प्यारा ,
पर जब गलत होता है,
तुझे सहन ना होता है,
सत्य से सबका संहार करता है,
सत्य से ही फिर निर्माण करता,
ये जीवन की पथशैली,
अब मुझको समझा दे,
तेरे हृदय में,
मेरे लिए क्षणिक सी जगह बना दे,
तेरे जैसा ध्यान,
मुझमें भी दीप जला दें,
मुझे पूरा नष्ट करके,
मुझे पूरा तेरा हो जाने दें,
अब इसके आगे,
जो तू समझे,
बस शुरू करो शिव शुरू करो शिव,
हे रोम रोम तेरे नाम शिव,
कृपा करो शिव कृपा करो शिव।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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